Ramayan Ke Rachayita Kaun Hai – रामायण के रचयिता कौन है?

Ramayan Ke Rachayita Kaun Hai (रामायण के रचयिता कौन है?) – रामायण का श्लोकों का स्मरण केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में किया जाता है। रामायण दुनिया भर में फैली हुई है। रामायण एक ऐंसा ग्रंथ है जो भारत के हर घर में पढ़ा जाता है। लेकिन क्या आप जानते है। रामायण के रचयिता कौन हैं? रामायण के लेखक कौन हैं? 

इस लेख में हम जानेंगे Ramayan Ke Rachayita Kaun Hai – रामायण के रचयिता कौन है? इसके अलावा हम इस लेख में जानेंगे की रामायण कब लिखी गई थी?, रामायण के रचयिता वाल्मीकि का जीवन परिचय?, रामायण कितने साल पुरानी है? इत्यादि जानकारी बारे में पढ़ने वाले है हम इस लेख के माध्यम से तो कृपया आप हमारे इस लेख अंत तक पढ़े। 

Ramayan Ke Rachayita Kaun Hai

Ramayan Ke Rachayita Kaun Hai – रामायण के रचयिता कौन है?

रामायण के रचयित वाल्मीकि (Valmiki) है। दुनिया का सबसे पहला कवि रामायण के रचयिता वाल्मीकि को ही माना जाता है। इन्हें महर्षि वाल्मीकि, रत्नाकर, त्रिकालदर्शी जैंसे नाम से भी जाना जाता है। वाल्मीकि को आदिकवि या भारत का पहला कवि भी कहा जाता है। वाल्मीकि जिनको डाकू के रूप में भी जाना जाता था। आगे जानेंगे की कैसे वाल्मीकि जी डाकू रूप में जाना जाता था। 

महर्षि वाल्मीकि ने रामायण कैसे लिखी?

वाल्मीकि का आश्रम तमसा नदी के किनारे था। एक बार उन्होंने वंहा दो पक्षियों के जोड़े को प्रेम करते हुए देखा। लेकिन एक शिकरी ने नर पक्षि को मार दिया जिसके बाद नर पक्षि पेड़ से निचे गिर गया। जिसके कारण मादा पक्षि उदास हो गई। ये सब देख वाल्मीकि जी को दया आ गई। साथ ही उस शिकरी पर क्रोध आ गया। जिसके बाद उनके मुँह से एक श्लोक निकल आया।

“मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगम: शाश्वती: समा:। यत् क्रौंचमिथुनादेकमवधी: काममोहितम्॥” ये श्लोक संस्कृत की मानव इतिहास की पहली काव्य रचना थी। इस शब्द का मतलब होता है ये निषाद तुम्हे कभी शांति नहीं मिलेगी क्यूंकि तुम दो प्रेमी जोड़े को अलग कर दिया है। साथ ही तुमने एक पक्षि की हत्या भी की है। इस कारन से वाल्मीकि को आदि कवी भी कहा जाता है। 

महर्षि वाल्मीकि का ध्यान उनके मुँह से निकले श्लोक पर गई तो उन्हें बहुत अफ़सोस हुआ की उन्होंने व्यर्थ में ही उस निषाद को इतना कठोर श्राप दिया है। तभी उनके पास ब्रह्मा जी दर्शन देते है। और बोले हे वाल्मीकि तुम्हारे मुँह से ये श्लोक ऐसे ही नहीं निकला बल्कि इसमें हमारी इच्छा भी है।

इसके बाद नारद मुनि वाल्मीकि जी के आश्रम पधारे और वंहा नारद मुनि ने ब्रह्मा जी का आदेश महर्षि वाल्मीकि सुनाई। नारद जी ने बताया कि भगवन राम की कथा को लिखने के लिए ब्रह्मा जी ने आपका चयन किया है। जिसके बाद नारद मुनि ने उन्हें भजन के माध्यम से संपूर्ण रामायण कथा सुनाई तथा उसे काव्य के रूप में लिखने का आदेश दिया। ब्रह्मा जी के आशीर्वाद स्वरुप महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना आरंभ की और पुरे चौबीस हज़ारो श्लोकों की रामायण लिख दी। 

रामायण के रचयिता वाल्मीकि का जीवन परिचय?

वाल्मीकि महर्षि कश्यप और अदिति के नौंवे पुत्र प्रचेता की संतान थे। वाल्मीकि जी के माता का नाम चर्षणी था। उनके एक भाई भी थे जिनका नाम भृगु था। वाल्मीकि जी को बचपन में एक भील (जंगली जाति का पुरुष) चुरा ले गया था। जिस कारण वे भील प्रजाति में पले-बढ़े। उस समय में उनका नाम रत्नाकर था। रत्नाकर (वाल्मीकि) राजा के राज्य में सैनिक थे।

वंहा के सैनिकों का युद्ध बंदियों (युद्ध के कैदी) के साथ अच्छा व्यवहार न होने के कारण रत्नाकर यानि वाल्मीकि जी ने विद्रोह किया। जिसके बाद वंहा के राजा ने उन्हें दंड देने के लिए घोषणा की जिसके बाद वे जंगल में छिपकर रहने लगे। जिसके बाद उन्होंने अपनी पेट भरने और जीविका चलाने के लिए राहगीरों से लूटपाट करना शुरू कर दिया और समय के साथ वे कुख्यात डाकू बन गए।

रत्नाकर डाकू से महर्षि वाल्मीकि कैसे बने?

रत्नाकर जब एक बार जंगल में किसी शिकार की तलाश कर रहे थे तब उनका सामना मुनिवर नारदजी से हुआ था। रत्नाकर नें नारदजी को लूटपाट के इरादे से बंदी बना लिया। तब नारदजी नें उन से एक सवाल पूछा “यह सब पाप कर्म तुम क्यों कर रहे हो?” तब रत्नाकर नें कहा कि ह यह सब अपने परिवार के लिए कर रहा है।

इस बात पर नारद मुनि बोले क्या तुम्हारे इस पाप कर्म के भुगतान करने के लिए तुम्हारे परिवार हिस्सेदार होंगे? इस बात पर रत्नाकर नें हां’बोल दिया। फिर नारद मुनि बोले एक बार अपने परिवार वालों से तो पूछ लो। यदि सभी तुम्हारे पाप कर्म के भुगतान करने के लिए तैयार होते है तो मैं अपना सभी धन और आभूषण देकर चला जाऊंगा।

तब रत्नाकर ने अपने परिवार के सभी सदस्य से यह बात पूछी लेकिन कोई भी सदस्य इस बात पर हाँ नहीं बोले। जिसके कारन रत्नाकर को बहुत दुख हुआ। इस घटना के बाद उन्होंने अपना पाप कर्म त्याग कर जप तप का मार्ग अपना लिया। जिसके बाद नारद मुनि ने रत्नाकर को राम नाम का मंत्र बताया। लेकिन रत्नाकर के मुँह से राम नाम नहीं निकल रहा था। तब नारद मुनि ने कहा तुम मरा-मरा बोलो इसीसे तुम राम मिल जायेंगे।

इस मंत्र को जपते जपते रत्नाकर ने राम की तपस्या में कब लीन हो गया। तपस्या करते करते कब उनके शरीर पर कब दीमकों ने अपना घर बना ली उन्हें पता ही नहीं चला। रत्नाकर की तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने दर्शन दिए और इनके शरीर पर लगे दीमकों को देखा तो रत्नाकर को वाल्मीकि नाम दे दिया जिसके बाद इनका यह नाम प्रसिद्ध हो गया।

निष्कर्ष – Ramayan Ke Rachayita Kaun Hai – (रामायण के रचयिता कौन है?)

हमें उम्मीद है की मेरे द्वारा लिखी गई Ramayan Ke Rachayita Kaun Hai (रामायण के रचयिता कौन है?) यह लेख आपको पसंद आया होगा। इसमें लेख में आपको Ramayan Ke Rachayita Kaun Hai – रामायण के रचयिता कौन है? महर्षि वाल्मीकि ने रामायण कैसे लिखी?, रामायण के रचयिता वाल्मीकि का जीवन परिचय?, रत्नाकर डाकू से महर्षि वाल्मीकि कैसे बने? इत्यादि जानकारी इस लेख के माध्यम से दी है। आप StudentExam.in को Facebook पर भी फॉलो कर सकते है।

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FAQs – Ramayan Ke Rachayita Kaun Hai

रामायण कब लिखी गई थी?

आधुनिक विद्वान का मानना है की रामायण 7 वीं से 4 वीं शताब्दी ईसा पूर्व लिखी गई थी।

सबसे पहले रामायण किसने लिखी थी?

शास्त्रों के अनुसार रामायण सबसे पहले हनुमानजी ने लिखी थी। जिसका नाम हनुमद रामायण थे। लेकिन हनुमानजी के द्वारा लिखी रामायण का कोई उचित प्रामण नहीं और ना ही हनुमानजी के द्वारा लिखी रामायण है। इसिलए सबसे पहले रामयण महर्षि वाल्मीकि ने लिखी है।

रामायण कितने साल पुरानी है?

नए रिसर्च के अनुसार रामायण आज से लगभग 9341 साल पुरानी है।

रामायण के लेखक कौन है?

रामायण के लेखक महर्षि वाल्मीकि (Maharishi Valmiki) है।

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