Proton Ki Khoj Kisne Ki – प्रोटॉन की खोज किसने की और कैसे की थी?

Proton Ki Khoj Kisne Ki (प्रोटॉन की खोज किसने की) – हम इस लेख में जानने वाले है की प्रोटॉन की खोज किसने की और कैसे की थी? (Proton Ki Khoj Kisne Ki) प्रोटोन से जुड़ी सभी तरह के सवाल का जवाब आपको इस लेख के माध्यम से मिलगा। यदि आप हमारे लेख पर प्रोटॉन की खोज किसने की थी? (Proton Ki Khoj Kisne Ki) यह जानने के लिए आए है तो यंहा आपको से बहुत आसानी से इन सभी सवाल का जवाब मिल जायेगा। तो कृपया आप हमारे इस लेख को ध्यान से अंत तक पढ़े। 

Proton Ki Khoj Kisne Ki

प्रोटॉन की खोज किसने की और कैसे की थी? – Proton Ki Khoj Kisne Ki

प्रोटॉन की खोज सबसे पहले यूजीन गोल्डस्टीन (Eugene Goldstein) ने सन 1886 में एनोड रे प्रयोग में H+ के रूप में की थीं। 1920 एर्नेस्ट रदरफोर्ड (Ernest Rutherford) ने अपने गोल्ड फ़ॉइल प्रयोग में परमाणु के नाभिक में मौजूद धनात्मक कण प्रोटॉन की खोज की और इसे हाइड्रोजन न्यूक्लियस से बदलकर प्रोटॉन नाम रख दिया। इसलिए इन्हे भी प्रोटॉन की खोजकर्ता कहते है। 

हम सभी जान चुके है की प्रोटॉन की खोज सबसे पहले यूजीन गोल्डस्टीन (Eugene Goldstein) और एर्नेस्ट रदरफोर्ड (Ernest Rutherford) द्वारा किया गया था। लेकिन प्रोटॉन के बारे सभी तरह की जानकारी प्राप्त करने के लिए हमें प्रोटॉन क्या है? प्रोटॉन की खोज कैसे और कब हुआ? ये सभी जानना होगा। जिससे हम प्रोटॉन के बारे सभी जानकारी प्राप्त कर सकते है। 

प्रोटॉन क्या है? – Proton Kya Hai?

प्रोटॉन एक उप-परमाणविक कण है जिस जिस पर धनात्मक आवेश उपस्थित होता है।  इसे p+ द्वारा सूचित किया जाता है। इस पर 1.602E−19 कूलाम्ब का धनात्मक आवेश होता है। प्रोटोन परमाणु नाभिक में न्यूट्रॉन के साथ पाया जाता हैं। इसका द्रव्यमान 1.6726E−27 किलो ग्राम होता है।

भौतिकी के आधुनिक मानक मॉडल के अनुसार – प्रोटॉन को मूल रूप से मौलिक या प्राथमिक कण माना जाता है। क्यूंकि ये छोटे छोटे अस्थाई सूक्ष्म कणों से मिलकर बना होता है। जिन्हे क्वॉर्क (Quarks) कहते हैं। प्रोटॉन तीन क्वार्क से मिलकर बने होते है।

प्रोटॉन की खोज किसने की और कैसे की थी? – Proton Ki Khoj Kisne Ki

प्रोटॉन की खोज सबसे पहले यूजीन गोल्डस्टीन (Eugene Goldstein) 1886 में एनोड किरण प्रयोग में प्रोटॉन को H+ रूप खोजा था। लेकिन यूजीन गोल्डस्टीन ने प्रोटॉन की खोज की केवल अनुमान लगाया था।

लेकिन 1920 में अर्नेस्ट रदरफोर्ड (Ernest Rutherford) ने प्रोटॉन के बारे में स्पष्ट जानकारी दी। अर्नेस्ट रदरफोर्ड के अनुसार परमाणु के नाभिक में एक धनात्मक केन्द्र पाया जाता है। इस नाभिक के केन्द्र में धनात्मक कण पाया जाता है। इन धनात्मक कणों को ही रदरफोर्ड ने प्रोटॉन नाम दिया। जिसके बाद अर्नेस्ट रदरफोर्ड को प्रोटॉन की खोजकर्ता कहा जाने लगा।

एर्नेस्ट रदरफोर्ड ने यह बताया की परमाणु के नाभिक बहुत संख्या में अलग अलग संख्या में प्रोटॉन न्यूट्रॉन के साथ धनात्मक वैद्युत आवेश में स्थित होता है। हाइड्रोजन परमाणु में 1 प्रोटॉन होता है। जिसके कारन हाइड्रोजन को प्राथमिक कण भी कहा जाता है। रदरफोर्ड अपने पिछले खोज में यह जाने थे की हाइड्रोजन नाभिक से परमाणु टक्कर द्वारा नाइट्रोजन के नाभिक से निकाला जा सकता है।

अर्नेस्ट रदरफोर्ड प्रोटॉन की खोज कैसे हुई?

एर्नेस्ट रदरफोर्ड ने गोल्ड फ़ॉइल एक्सपेरिमेंट में एक अल्ट्राथिन गोल्ड फ़ॉइल पर अल्फा कणों की बमबारी कराई, जिससे पता लगा कि अल्फा कणों ज़िंक सल्फाइड स्क्रीन पर गिरने पर बिखर रहे थे। इससे अर्नेस्ट रदरफोर्ड तीन बात समझे। 

  • अधिकांश अल्फा पार्टिकल डिफ्लेक्ट नहीं हुए, वे पन्नी से पास हो गए।
  • कुछ अल्फा पार्टिकल छोटे एंगल पर डिफ्लेक्ट हुए।
  • बहुत कम ऐसे पार्टिकल थे जो फ़िर से वापस आए।

एर्नेस्ट रदरफोर्ड रेडियो सक्रीय के सन्दर्भ में कई Experiment कर रहे थे। बहुत से सफल और असफल एक्सपेरिमेंट के बाद अनुमान लगाया की परमाणु के नाभिक में एक धनात्मक केन्द्र पाया जाता है। इस केंद्र में परमाणु की अधिकतम भर होता है। परमाणु के इस केंद्र में धनात्मक कण होता है। एर्नेस्ट रदरफोर्ड ने इन धनात्मक कण को ही प्रोटॉन नाम रखा।

प्रोटॉन की खोज का इतिहास – History of Proton Discovery in Hindi

  • 1815 में विलियम प्राउट (William Prout) जो चिकित्सक और प्राकृतिक धर्मशास्त्री थे। उन्होंने ने प्रस्तावित किया कि सभी परमाणु हाइड्रोजन के परमाणुओं से बने होते हैं जिसे उन्होंने प्रोटाइल्स नाम दिया था।
  • यूजेन गोल्डस्टीन 1886 में एनोड किरणों की खोज की और दिखाया कि वे गैसों से उत्पन्न धनात्मक आवेशित कण थे। जिसे आज हम प्रोटॉन के नाम से जानते है।
  • 1898 में विल्हेम विएन जो एक German Physicist थे। और 1910 में जे.जे. थॉमसन ये भी एक Physicist थे। दोनों ने हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान के बराबर एक धनात्मक कण की पहचान की थीं।
  • 1911 में एंटोनियस वैन डेन ब्रोक ने प्रस्तुत किया कि आवर्त सारणी में प्रत्येक तत्व का स्थान उसके परमाणु आवेश के बराबर है। जिसके बाद हेनरी मोसले द्वारा 1913 में एक्स-रे स्पेक्ट्राका उपयोग करके प्रयोगात्मक रूप से इसकी पुष्टि की गई थी। 
  • 1925 में रिपोर्ट किए गए प्रयोगों में, रदरफोर्ड ने साबित किया कि हाइड्रोजन नाभिक अन्य नाभिकों में मौजूद है। जिसे हम प्रोटॉन कहते है। लेकिन प्रोटॉन शब्द का पहला प्रयोग 1920 में ही हुआ था।

निष्कर्ष – Proton Ki Khoj Kisne Ki

Proton Ki Khoj Kisne Ki – इस लेख में हमने जाना की प्रोटॉन की खोज सबसे पहले यूजीन गोल्डस्टीन ने की थी। लेकिन यूजीन गोल्डस्टीन केवल अनुमान लगाए थे। जिसके बाद 1920 एर्नेस्ट रदरफोर्ड ने दुनिया को बताया की परमाणु के नाभिक में एक धनात्मक केन्द्र पाया जाता है। इस नाभिक के केन्द्र में धनात्मक कण पाया जाता है।इन धनात्मक कणों को प्रोटॉन कहा जाता है।

इस तरह से एर्नेस्ट रदरफोर्ड को प्रोटॉन की खोज करने वाला कहा गया। प्रोटॉन की खोज किस तरह से हुआ ये सभी जानकारी आपको इस लेख में मिल जायेगा। उम्मीद है की प्रोटॉन की खोज किसने की और कैसे की? (Proton Ki Khoj Kisne Ki) यह लेख आपको पसंद आया होगा। आप हमें Facebook पर फॉलो सकते है।

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FAQs – Proton Ki Khoj Kisne Ki

प्रोटॉन की खोज सबसे पहले किसने की थी?

प्रोटॉन की खोज सबसे पहले यूजीन गोल्डस्टीन ने सन 1886 में की थीं।

प्रोटॉन की खोज की प्रमाणित किसने की थी?

प्रोटॉन की खोज की प्रमाणित एर्नेस्ट रदरफोर्ड 1920 में की थी। जिसके कारन एर्नेस्ट रदरफोर्ड को भी प्रोटॉन की खोज करने वाला कहा जाता है।

प्रोटॉन की असली खोजकर्ता कौन है?

प्रोटॉन की असली खोजकर्ता एर्नेस्ट रदरफोर्ड को कहा जाता है। क्यूंकि इन्होंने प्रोटॉन की खोज की प्रमाण भी दुनिया को दिया। ऐसे में यह भी कहना गलत नहीं होगा की प्रोटॉन की खोज सबसे पहले यूजीन गोल्डस्टीन ने ही की थीं।

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