Durga Puja Par Nibandh – दुर्गा पूजा पर निबंध 2022

Durga Puja Par Nibandh: दोस्तों आज के हम इस पोस्ट में Durga Puja Par Nibandh – दुर्गा पूजा पर निबंध लिखने वाले है। अक्सर हमें अपने स्कूल और कॉलेज में दुर्गा पूजा पर निबंध लिखने को मिलता है। यंहा तक की दुर्गा पूजा पर निबंध कभी कभी स्कूल और कॉलेज या फिर बोर्ड एग्जाम में Durga Puja Par Nibandh – दुर्गा पूजा पर निबंध लिखने को आता है।

दुर्गा पूजा हिन्दू धर्म मुख्य त्योहार है। इस त्योहार को बंगाल और ओडिशा में दुर्गोत्सव या शरदोत्सव के नाम से भी जाना जाता है। वैसे तो यह पूजा सितम्बर या अक्टूबर के महीनें में मनाया जाता है। वैसे तो यह पूजा पूरा भारत में मनाया जाता है। लेकिन मुख्य रूप से यह बंगाल, बिहार, असम, उड़ीसा, झारखण्ड इत्यादि राज्य में मनाया जाता है। यह पूजा पुरे 9 दिन तक मनाया जाता है।

Durga Puja Par Nibandh

Durga Puja Par Nibandh – दुर्गा पूजा पर निबंध

प्रस्तावना: दुर्गा पूजा हिन्दुओं त्योहारों है। जो अक्टूबर के महीना में मनाया जाता है। ये प्रतेक वर्ष माँ दुर्गा के सम्मान में मनाया जाता है। माना जाता है की दुर्गा माँ मैनका की पुत्री और सती का अवतार थी। यह दुर्गा पूजा उस समय से शुरू हुआ जब  श्री राम ने रावण का वध करने के लिए माँ दुर्गा से शक्ति मांगी थी।

हम दुर्गा पूजा क्यों मनाया जाता है?

दुर्गा पूजा मानाने के पीछे कई कथाये प्रचलित है, जिनमे से एक कथा यह है की, एक महिषासुर नाम का एक दानव था जो की एक राजा भी था जिसने स्वर्ग के देवी देवताओ आक्रमण कर दिया था। वह इतना ताकतवर था की उसे कोई हरा ही नहीं पाता था परंतु दुर्गा देवी ने उस महिषासुर से लगातार नव दिनों का युद्ध करा करने के पश्चात दसवे दिन उस महिषासुर का वध कर दिया था। इसलिए उस दिन को हम विजय दशमी के रूप में मानते है। 

रामायण के अनुसार भगवान राम ने रावण को मारने के लिए माँ दुर्गा से चंडी पूजा करवाई थी। दस हाथो में अलग अलग हथियार माँ दुर्गा में एक नारी का रूप भी है। माँ दुर्गा के कारण सभी लोगो को राक्षस से मुक्ति मिली थी। इसलिए सभी लोग माँ दुर्गा की मन और श्रद्धा से पूजा करते है। दुर्गा पूजा में नव दिनों के पूजा को नवरात्री भी कहा जाता है। 

जैसा की हम सब को पता है, की दुर्गा पूजा हिन्दुओ का बहुत महतवपूर्ण त्यौहार है। यह बंगालियों का प्रमुख त्यौहार है और बंगाली दुर्गा पूजा खूब धूम धाम से मानते है। दुर्गा पूजा की शुरुआत तब हुई थी। जब भगवान राम ने रावण को मारने के लिए माँ दुर्गा से चंडी पूजा करवाई थी। और तब से ही दुर्गा पूजा की शुरुआत हो गई। 

Durga Puja Par Nibandh – दुर्गा पूजा पर निबंध 300 शब्दो में

प्रस्तावना: जैसे की आप सभी को पता है की दुर्गा पूजा एक हिंदिओं का त्योहार जिसे बंगाल के लोग यानि बंगाली बहुत धूम धाम से मनाते है। यह मुख्य रूप से बंगाल, बिहार, असम, उड़ीसा, झारखण्ड इत्यदि राज्य में बहुत धूम धाम से मनाया जाता है। यह त्यौहार अक्टूबर माह में मनाया जाता है। यह पूजा दस दिन तक मनाया जाता है जिसमे सप्तमी, अष्ठमी, नमी और दशमी ये चार बहुत धूम धाम से मनाया जाता है। जिन जी राज्य में यह त्यौहार मनाया जाता है वंहा इन चार दिन सप्तमी, अष्ठमी, नमी और दशमी कई बड़े बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। जिसमे बुराई पर अच्छाई की जित को दिखाया जाता है। 

दुर्गा पूजा मानाने के कारन: माना जाता है की महिषासुर ने स्वर्ग के देवताओं पर अकर्मण करने के लिए तैयार था। वे सवर्ग के देवताओं पर अकर्मण कर वंहा पर राज करना चाहता था। वैसे महिषासुर बहुत अधिक शक्तिशाली था जो कभी भी किसी से हारा नहीं था। इन्हीं शक्तिओं के कारन वे सवर्ग के देवी देवताओं पर राज करना चाहता था। ये सब देखते हुए ब्रम्हा, विष्णु और महेश जी ने महिषासुर का अंत करने के लिए एक देवी शक्ति का निर्माण किया गया और सभी देवी देवताओं ने उनको आंतरिक शक्ति दी, जिसके बाद उस देवी शक्ति का नाम दुर्गा रखा गया। हम इन्हे माँ दुर्गा के नाम से जानते है। माँ दुर्गा के दस हाथ थे, सभी हाथ में बिशेस शक्ति वाला हथियार था।

जिसके बाद माँ दुर्गा ने नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया था तथा अंतमि दशवें दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर का अंत कर दिया। जिसके बाद से हम दुर्गा पूजा मानाने लगें और अंतिम दशवें दिन दशहरे और विजयदशमी के रूप में भी मनाते है। जिसके बाद से हम दुर्गा पूजा मानाने लगें और अंतिम दशवें दिन दशहरे और विजयदशमी के रूप में भी मनाते है।  अंतिम दशवें दिन ही भगवान श्री राम ने रावण का अंत करने के लिए माँ दुर्गा से शक्ति प्राप्त की और अंतिम दशवें दिन ही श्री राम ने रावण का अंत कर दी थी।   

Durga Puja Par Nibandh – दुर्गा पूजा पर निबंध 500 शब्दो में

प्रस्तावना: वैसे तो भारत में सबसे अधिक त्यौहार मनाया जाता है। सभी धर्म के अपने अपने त्यौहार होते है। उन्हीं सभी त्यौहार में से एक हिंदिओं का त्यौहार है दुर्गा पूजा जिसे दुर्गोत्सव भी कहा जाता है। दुर्गा पूजा अश्विन महीने में 10 दिनो तक मनाया जाता है। इस त्यौहार को दशहरा, दुर्गा पूजा, बिजय दशमी, नवरात्रि आदि नामों से भी जाना जाता है।  

दुर्गा पूजा मानाने के कारन क्या है?

माना जाता है की एक महिषासुर नाम का एक राक्षस था जिसे ब्रम्हा जी से वरदान मिला था की, कोई भी देवता या दानव उसको हरा नहीं सकता है। ब्रम्हा जी से ये वरदान मिलने के बाद वे सवर्ग लोक के देवी देताओँ पर अत्याचार और अकर्मण करने लगा, और ब्रम्हा जी के वरदान के कारन इसे कोई देवता हरा नहीं सकते थे। जिसके बाद ब्रम्हा, विष्णु और महेश भगवान जी ने एक नया देवी शक्ति का निर्माण किया और उनका नाम दुर्गा रखा।

जिसके बाद माँ दुर्गा का सामान माँ दुर्गा से हुआ उसके बाद से पुरे नव दिनों तक युद्ध चला और दशवें दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर का अंत कर दिया।महिषासुर का जिस दिन अंत हुआ उसी दिन ही भगवान श्री राम ने माँ दुर्गा से शक्ति प्राप्त करने के लिए चंडी पूजा की थी। जिसके बाद श्री राम ने रावण का अंत कर दिए। जिसके बाद से इसे दशहरा और बिजयदशमी के रूप में मनाया जाने लगा। दशमी के दिन ही बुराई पर अच्छाई की जित हुई।

दुर्गा माँ की रूपरेखा: माँ दुर्गा की दस हाथ है प्रतेक हाथ में अलग अलग प्रकर के बिशेष शक्ति वाला हथियार है। माना जाता है की माँ दुर्गा सती का अवतार थी जो मेनका और हिमालय की पुत्री थी। माँ दुर्गा की शादी भगवान शिव से हुवा था।

दुर्गा पूजा में क्या होता है?

Durga Puja Par Nibandh: दुर्गा पूजा को लोग अपने अपने तरीका से मानते है। बहुत से लोग दुर्गा पूजा में पुरे नव दिनों तक उपवास रखते है, और माँ दुर्गा की पूजा प्रति दिन करते है। उपवास रहने का मतलब ये नहीं ये कुछ नहीं खाते है इसका मतलब ये फल और पानी पि सकते है, केवल ये अनाज नहीं खा सकते है। इसके अलावा कुछ लोग इस पूजा को शुरुआती दिन और अंतिम दिन को उपवास रहते है।

बहुत से ऐसे लोग भी जो इस पूजा को करने के लिए नव दिन उपवास रखते है जो लोग किसी भी वजह को लेकर मन्नत मांगी हो। दुर्गा पूजा में दुर्गा माँ की पूजा की अंतिम तीन दिन यानि सप्तमी, अष्ठमी, नवमी इन दिनों बहुत धूम धाम से मनाया जाता है। जिन जिन राज्य और देश में यह पूजा मनाया जाता है। वंहा बहुत बड़े बड़े दुर्गा माँ का पंडाल बनाया गया रहता है, और वंहा मेला भी लगता है।

जिसके कारण हजारों की संख्या में लोगो की भीड़ लगी होती हैं। दुर्गा पूजा की नवे दिन यानि नवमी के दिन जो जो महिला या लड़की नव दिनों तक उपवास रखती है वे नव लड़किओं को बैठा कर उनकी पूजा करती है, और प्रसाद खिलाती है। दुर्गा पूजा की अंतिम दिन यानि दशवे दिन माँ दुर्गा की मूर्ति को भषाण यानि बिषर्जन किया जाता है। दशमी के दिन ही श्री राम ने रावण का वध किया था। जिसके कारन दशमी के दिन रावण का पुतला जलाया जाता है। जिसे हम रावण दहन भी कहते है। इसके अलावा दशमी के दिन राम रावन का कार्यक्रम भी कराया जाता है।

Essay of Durga Puja in Hindi 250 Words – Durga Puja Par Nibandh

प्रस्तावना: भारत में विभिन्न धर्मों लोग रहते है सभी धर्मो की अपना अपना त्योहार है। उन्ही में से एक त्योहार हिन्दीओ का दुर्गा पूजा है। यह पूजा पूर्वी भारत के लोगों द्वारा मनाया जाता है। इस पूजा को भारत देश के अलावा अन्य देश में भी मनाया जाता है। दुर्गा पूजा मुख्य रूप से बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा आदि राज्य में बहुत धूम धाम से मनाया जाता है। इस समय माँ दुर्गा की पूजा पुरे नव दिन तक किया जाता है।  

भारत में दुर्गा पूजा क्यों मनाया जाता है?:  दुर्गा पूजा जिसे हम बहुत से नाम से भी जानते है जिनमे से कुछ ये है, दशहरा, नवरात्रि, बिजय दशमी, दुर्गोत्सव या शरदोत्सव आदि नाम से जानते है। यह पूजा बुराई के ऊपर अच्छाई की जित को दर्शता है।

माना जाता है की माँ दुर्गा ने  महिषासुर नाम के राक्षस से पुरे नव दिन तक युद्ध की उसके बाद अंतिम दशवें दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर का अंत कर दी जिसके बाद से यह पूजा दुर्गा पूजा के नाम से हर साल मनाया जाने लगा। कहा जाता है की उसी दिन ही भगवन श्री राम ने रावण का नट करने के लिए माँ दुर्गा से शक्ति प्राप्त की थी। जिसके बाद श्री राम ने रावण का अंत कर दीये।

माँ दुर्गा पूजा की पूजा: दुर्गा पूजा आता है तब उन लोगो की घर में बहुत धूम धाम से तैयारी होता है जिनके घर में कोई माँ दुर्गा की पूजा करने के लिए नव दिनों तक उपवास रखता है। कुछ महिला और लड़की पहला और अंतिम दिन उपवास रह कर माँ दुर्गा की पूजा करती है। वही जो लड़की या महिला इस पूजा को नव दिन तक करती है वे प्रति दिन सुबह शाम माँ दुर्गा की पूजा करती है। दुर्गा पूजा की नवें दिन जो महिला और लड़की पुरे नव दिन तक उपवास रखती है, उन्हें अपने घर नव लड़किओं को बुला कर सम्मान पूर्वक पूजा करती है तथा प्रसाद खिलाती है।

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निष्कर्ष – Durga Puja Par Nibandh 

दोस्तों हमें उम्मीद है की आप Durga Puja Par Nibandh – दुर्गा पूजा पर निबंध आप सभी को पसंद आया होगा। हमने इस पोस्ट के माध्यम से आप सभी तक Durga Puja Par Nibandh बहुत ही आसान शब्दो में लिखा है। इसमें हमने दुर्गा पूजा पर निबंध 500, 300, 250 शब्दों में लिखा है। जो आप सभी के लिए महत्वपूर्ण होने वाला है। आप हमें Facebook पर फॉलो कर सकते है।  

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